व्यापार एक लालची एक ईमानदार 

दो दोस्तो का व्यापार एक लालची एक ईमानदार 

एक गांव में दो दोस्त रहते थे । एक का नाम मोहन और एक का नाम सोहन था । मोहन

बहुत ही मेहनती और ईमानदार था ।और सोहर एक आलसी था जिसे कोई भी काम

ईमानदार व्यापारी की कहानी business ideas

अच्छा नहीं लगता था ।मोहन ने  एक कारोबार शुरू किया जो दूध का था । मोहन

गावो में दूध बेचता था । और सोहन ने अभी कुछ भी नहीं किया था । मोहन ने दूध बेचकर

जो अपने पैसे जमा किया उसे एक साइकिल खरीदी जिसे की वो बाकी के गावो में भी दूध

बेचा करे और उसका व्यापार और भी ज्यादा बड़े एक दिन जब मोहन दूध बेचने गया था ।

तो तभी रास्ते में सोहन मिल मोहन की साइकिल देख कर चोक गया और वो थोड़े

गुस्से में चला गया । घर जाके सोहन ने भी अपने व्यापार के बारे में सोचा और उसने यह

सोचा कि को एक जलेबी का व्यापार करेगा । उसने जलेबी की दुकान खोली । सोहन बहुत

ही अच्छी जलेबी बनता था । जिसे गवॅ वालो को उसकी जलेबी बहुत ही अच्छी लगने लगी

और धीरे धीरे उसके  व्यापार बड़ने लगा और उसकी जलेबी बहुत से गावो में फेल गई ।

कुछ दिन बाद उसके मन में एक खयाल आया कि उसके जैसा जलेबी कोई नहीं बनता है

क्यों ना में रेत बड़ा दु । तो उसने कुछ दिन बाद से रेट बदना सुरु कर दिया । जिससे कि

लोगो ने सोच कर कहा तुमने अपनी जलेबी का रेट क्यों बड़ा दिया बाकी जगह तो बहुत

ही सस्ता जलेबी मिल रहा है । तो जलेबी वाले ने कहा मेरे जैसी जलेबी कोई नहीं बेचता

अगर आपको किसी और दुकान पर जाना है तो आप लोग जा सकते है ।

मजबुरन लोगो को सोहन से जलेबियां खरीदनी पड़ी । कुछ दिन बाद सोहन और भी

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लालच में आ गया है उसने सोचा क्यों ना में अपनी ओर भी जलेबी काम काम तोल कर दु 

ये भी कुछ दिन बाद से उसने अपने तराज़ू में एक चुंबक लगा दिया जिससे जलेबी और भी

काम तोल सके । एक दिन उसी रास्ते उस गवॅ का जमींदार जा रहा था जब जमींदार ने

जलेबी वाले के चर्चे सुना तो उसने भी अपने नौकर से एक किलो जलेबी मंगवाई । जब

उसके नौकर जलेबी को जमींदार के पास ले जाते है । तब जमींदार को बहुत की काम

जलेबी लगती है और वो नौकर पर गुस्सा हो जाता है । फिर जमींदार खुद उस जलेबी वाले

के पास जाता है और वह खड़े एक भिखारी को जलेबी के दुकान पर देखता है तो जमींदार

छुप जाता है और जलेबी वाले पर नजर रखता है । भिखारी जलेबी वाले के पास

जाता है  और उसके पास जलेबी मांगता है उसकी जालेबी बहुत महंगी थी और उसके

पास दो रूपए थे । जलेबी वाला उस भिखारी को जलेबी नहीं देता है फिर जलेबी वाले ने

भिखारी को बुलाया और बोलने लगा तुमने मेरी जलेबी की सुगंध सुंघी है वो दो रूपए दे

दो मुझे ये बात सुं कर जमींदार भी आ जाता है और भिखारी और एक थैले में पैसे भरा

हुआ था वो थेला भिखारी को जमींदार ने से दिया और भिखारी को बोला सोहन को थेल दे

दो । यह सुन कर भिखारी सोहन को थैला देने लगता है तभी जमींदार भिखारी रो रोकते है

और बोलते है पहले थैले को जोर से हिलाओ भिखारी थैले को जोर से हिलाता है । और

जमींदार जलेबी वाले को बोलता है भिखारी ने भी पैसे दे दिया ये सुनकर सोहन बहुत ही

निराश हुआ और जमींदार से माफी मांगने लगा । जमींदार बहुत गुस्से में थे । तभी मोहन

वहा आता है और अपने दोस्त सोहन की तरफ से माफी मांगता है जमींदार उसको माफ

ईमानदार व्यापारी की कहानी business ideas

कर देता है ।तब सोहन ने ईमानदारी का रास्ता पर चलने का फैसला कर लिया ।

इसलिए ज्यादा लालच नहीं करना चाहिए ।

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